युसुवी
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अध्याय 2 : गाँव का डर
एक ऐसी बच्ची जिससे पूरा गाँव डरता था...
उस रात मैं गाँव के मुखिया के घर ठहरा था।
लेकिन सच कहूँ तो मेरा शरीर भले ही उस छोटे से कमरे में था, मेरा मन अभी भी उसी लोहे के पिंजरे के पास खड़ा था।
बार-बार वही चेहरा मेरी आँखों के सामने आ रहा था।
उलझे हुए बाल।
घायल हाथ।
और वो आँखें...
जिनमें दर्द था, लेकिन नफ़रत नहीं।
मैं करवटें बदलता रहा।
आखिरकार मैंने तय किया कि इस रहस्य को जाने बिना मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा।
सुबह जब मेरी आँख खुली तो गाँव पूरी तरह जाग चुका था।
औरतें कुएँ से पानी भर रही थीं।
बच्चे खेतों की तरफ भाग रहे थे।
बुजुर्ग चौपाल पर बैठकर हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे।
सब कुछ सामान्य लग रहा था।
लेकिन मुझे पता था कि इस गाँव की शांति सिर्फ ऊपर से दिखाई देती है।
अंदर कहीं न कहीं डर छिपा हुआ है।
और उस डर का नाम था—
युसुवी।
मैं चौपाल की तरफ गया।
वहाँ बैठे बुजुर्गों ने मुझे देखते ही जगह दे दी।
मैं उनके बीच बैठ गया।
कुछ देर तक मौसम और खेती की बातें होती रहीं।
फिर मैंने पूछा—
"युसुवी कौन है?"
जैसे ही मैंने उसका नाम लिया, पूरा माहौल बदल गया।
एक बुजुर्ग के हाथ से हुक्का लगभग छूट गया।
दूसरे ने तुरंत चारों तरफ देखा।
जैसे किसी ने कोई निषिद्ध शब्द बोल दिया हो।
"बेटा उसका नाम मत लिया करो।"
एक बूढ़े ने धीरे से कहा।
"क्यों?"
"क्योंकि वो अशुभ है।"
मैं मुस्कुराया।
"एक बार नाम लेने से कोई अशुभ कैसे हो सकता है?"
लेकिन इस बार कोई नहीं हँसा।
सबसे बूढ़े आदमी ने गहरी साँस ली।
उसका चेहरा झुर्रियों से भरा था।
आँखों में उम्र का अनुभव साफ दिख रहा था।
उसने कहा—
"आज से बारह साल पहले इस गाँव में सब कुछ अच्छा था।"
"फिर?"
"फिर वो पैदा हुई।"
उसकी बात सुनकर मैं चुप हो गया।
"जिस रात युसुवी पैदा हुई थी, उसी रात पहाड़ का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गया था।"
"सिर्फ एक संयोग होगा।"
मैंने कहा।
बूढ़ा आदमी मेरी तरफ देखने लगा।
"हमें भी ऐसा ही लगा था।"
"फिर?"
"फिर हादसे बढ़ने लगे।"
एक किसान की सारी फसल बर्बाद हो गई।
एक चरवाहे की दर्जनों भेड़ें अचानक मर गईं।
एक बच्चा कुएँ में गिर गया।
किसी का घर जल गया।
किसी का परिवार बीमार पड़ गया।
और हर हादसे के बाद लोगों की उँगली उसी बच्ची की तरफ उठने लगी।
युसुवी।
मैंने पूछा—
"लेकिन किसी हादसे से उसका क्या संबंध था?"
बूढ़ा आदमी कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला—
"कोई संबंध नहीं था।"
मैं चौंक गया।
"क्या मतलब?"
"मतलब बस इतना कि जब लोगों को किसी बात का कारण नहीं मिलता, तो वे किसी को दोषी बना देते हैं।"
यह सुनकर बाकी लोग असहज हो गए।
जैसे उन्हें यह बात पसंद नहीं आई।
एक आदमी बीच में बोल पड़ा—
"नहीं दादा! आपने खुद नहीं देखा था क्या?"
"क्या?"
"जब युसुवी सात साल की थी और मंदिर गई थी?"
सभी की आँखों में डर उतर आया।
मैं ध्यान से सुनने लगा।
"उस दिन वो मंदिर गई थी।"
"फिर?"
"और उसी रात मंदिर की घंटी अपने आप बजने लगी।"
मैं हँसी रोक नहीं पाया।
लेकिन किसी ने हँसने की कोशिश नहीं की।
उनके लिए यह मजाक नहीं था।
उनके लिए यह डर था।
सालों से जमा हुआ डर।
तभी एक बुजुर्ग महिला वहाँ आकर बैठ गई।
वह अब तक चुप थी।
लेकिन अब उसने पहली बार कहा—
"तुम लोग झूठ बोल रहे हो।"
पूरा चौपाल शांत हो गया।
"क्या मतलब?"
मुखिया ने पूछा।
बूढ़ी औरत ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में आँसू थे।
फिर उसने धीरे से कहा—
"युसुवी बुरी नहीं है।"
यह सुनते ही चौपाल में बैठे लोग गुस्से में भर गए।
"चुप रहो!"
"तुम फिर उसका पक्ष ले रही हो!"
"वो पूरे गाँव के लिए अभिशाप है!"
लेकिन बूढ़ी औरत नहीं डरी।
उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा—
"अगर सच जानना है..."
वह कुछ क्षण रुकी।
"...तो आज रात पुराने कुएँ के पास आना।"
मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही वह उठकर चली गई।
पूरा चौपाल उसे घूरता रहा।
जैसे उसने कोई अपराध कर दिया हो।
लेकिन मेरे लिए अब कहानी और भी दिलचस्प हो चुकी थी।
क्योंकि पहली बार किसी ने कहा था—
युसुवी डायन नहीं है।
उस शाम मैं फिर पिंजरे के पास गया।
भीड़ पहले से कम थी।
युसुवी एक कोने में बैठी थी।
उसने मेरी तरफ देखा।
इस बार उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था।
सिर्फ थकान थी।
बहुत गहरी थकान।
मैं कुछ कहना चाहता था।
लेकिन तभी मेरी नजर उसके हाथ पर गई।
उसकी कलाई पर एक अजीब सा निशान बना हुआ था।
एक गोल चिन्ह।
जिसके बीच में एक अजीब प्रतीक उकेरा हुआ था।
मैंने उसे पहले कभी नहीं देखा था।
लेकिन जैसे ही मैंने उस निशान को देखा...
मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।
क्योंकि बिल्कुल वही निशान मैंने उस सुबह गाँव के पुराने मंदिर की दीवार पर भी देखा था।
क्या यह सिर्फ संयोग था?
या युसुवी का उस निशान से कोई संबंध था?
और बूढ़ी औरत मुझे रात में पुराने कुएँ पर क्यों बुला रही थी?
अध्याय 2 समाप्त
क्या आपको लगता है कि युसुवी सचमुच एक बुरा साया है?
या पूरा गाँव किसी बड़े सच को छुपा रहा है?
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👉 अगला अध्याय जल्द आ रहा है।
अगले अध्याय में...
🌑 आधी रात को पुराने कुएँ के पास कौन मिलने वाला है?
🌑 युसुवी की कलाई पर बना रहस्यमयी चिन्ह क्या है?
🌑 और क्यों पूरा गाँव एक ऐसा सच छिपा रहा है, जिसका संबंध युसुवी के जन्म से है?
जारी रहेगा...
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पूरा गाँव उससे डरता था...
लेकिन एक बुजुर्ग महिला ने कहा—
"युसुवी डायन नहीं है।"
तो फिर सच क्या है?
📖 पढ़िए: युसुवी अध्याय 2 - गाँव का डर
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